रायगढ़। छत्तीसगढ़ पुलिस में अपनी सख्त,प्रभावी और परिणाम-केंद्रित पुलिसिंग के लिए पहचाने जाने वाले संतोष कुमार सिंह ने अब एक नई और कहीं अधिक व्यापक जिम्मेदारी संभाल ली है। उन्होंने हैदराबाद स्थित मुख्यालय में सीआईएसएफ दक्षिण जोन–2 के डीआईजी के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया है।
यह जिम्मेदारी साधारण नहीं है। उनके अधीन अब पूरे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तरी कर्नाटक में फैली सीआईएसएफ-सुरक्षित इकाइयों—जिनमें कोयला एवं खनन परियोजनाएं,औद्योगिक कारखाने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और अन्य संवेदनशील संस्थान शामिल हैं—की सुरक्षा व्यवस्था का दायित्व होगा। इसके साथ ही बंगाल और ओडिशा के कुछ प्रमुख बंदरगाहों की सुरक्षा भी उनकी निगरानी में रहेगी, जो देश की आर्थिक गतिविधियों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। छत्तीसगढ़ में अपने कार्यकाल के दौरान संतोष कुमार सिंह ने जिस प्रकार कानून-व्यवस्था को मजबूत किया,अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया और पुलिसिंग में पेशेवर दक्षता का उदाहरण प्रस्तुत किया,उसने उन्हें एक भरोसेमंद और परिणाम देने वाले अधिकारी के रूप में स्थापित किया। उनकी कार्यशैली में सख्ती के साथ-साथ रणनीतिक सोच और त्वरित निर्णय क्षमता साफ झलकती रही है। अब राष्ट्रीय स्तर की इस जिम्मेदारी में उनके सामने चुनौतियां भी उतनी ही बड़ी हैं—औद्योगिक सुरक्षा,आतंकी खतरों की रोकथाम,संवेदनशील प्रतिष्ठानों की निगरानी और समुद्री बंदरगाहों की सुरक्षा जैसे जटिल आयाम उनके नेतृत्व कौशल की नई परीक्षा लेंगे,लेकिन जिस तरह उन्होंने अब तक हर जिम्मेदारी को सफलता में बदला है,उससे यह उम्मीद मजबूत होती है कि वे इस नई पारी में भी अपनी कार्यकुशलता और नेतृत्व से एक नई मिसाल कायम करेंगे। उनकी नियुक्ति न केवल उनके व्यक्तिगत कद को दर्शाती है,बल्कि छत्तीसगढ़ पुलिस की कार्यशैली और वहां से निकले नेतृत्व की क्षमता का भी प्रमाण है।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संतोष कुमार सिंह अपनी इस नई भूमिका में सुरक्षा के मानकों को किस ऊंचाई तक ले जाते हैं लेकिन संकेत साफ हैं,यह सफर भी चमकदार होने वाला है।