रायगढ़। जिले के ग्राम एकताल में रैम्प परियोजना के अंतर्गत संचालित 3 दिवसीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का 28 नवम्बर को सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह प्रशिक्षण 26 से 28 नवम्बर तक आयोजित किया गया, जिसमें पारंपरिक धोकड़ा कला से जुड़े 30 हस्त शिल्पियों एवं उभरते उद्यमियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को आधुनिक व्यवसायिक ज्ञान से सशक्त करना, धोकड़ा कला को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना तथा पारंपरिक कौशल में उद्यमिता के नए अवसर पैदा करना था।

तीन दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को उद्यमिता विकास, मार्केटिंग लिंकज, वित्तीय साक्षरता, बिजनेस मॉडल कैनवस, उत्पाद विविधीकरण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को वर्तमान बाजार की मांग, उपभोक्ता व्यवहार, डिजिटल मार्केटिंग और उद्यम संचालन के नवीन तरीकों से परिचित कराया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने वित्त प्रबंधन, पूंजी व्यवस्था, बाजार विस्तार और उत्पादों के मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा की। सबसे अधिक जोर इस बात पर दिया गया कि किस प्रकार धोकड़ा कला उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाया जा सकता है।

समापन कार्यक्रम में भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान, अहमदाबाद से आए विशेषज्ञ विनय यादव, एकताल के सरपंच हिमांशु चौहान, वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षक संदीप प्रधान, तथा धोकड़ा कला प्रशिक्षक धनीराम झारा और सुंदरलाल झारा विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों को आगे भी अपने व्यवसाय में नवाचार लाने और प्रशिक्षण के दौरान सीखी तकनीकों को व्यवहार में लाने के लिए प्रोत्साहित किया।स्थानीय हस्त शिल्पियों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत लाभकारी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें अपने व्यवसाय को नई दिशा देने, आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं को समझने और विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने में बड़ी सहायता मिली है। रैम्प परियोजना के तहत आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम धोकड़ा कला जैसी महत्वपूर्ण पारंपरिक धरोहर को संवारने और उसे आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक प्रभावी कदम सिद्ध हुआ है।